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Project Lemon Choos – creating children’s literature in Maithili

नन्हें बच्चों के लिए खुली किताब, एक दर्पण तथा एक खिड़की, दोनों की तरह काम करती है, जो ख़ुद को तथा जिस दुनिया में वे रहते हैं उसे, बेहतर तरीक़े से जानने में उनका साथ देती है। या कहें कि यह बच्चों को उनकी ज़िन्दगी से जुड़ी घटनाओं, किस्सों – कहानियों और मुद्दों के साथ साथ एक ऐसी दुनिया से भी परिचित करवाती है जो उन्होंने देखी तक नहीं है या अभी देखना बाकी है।

बाल साहित्य से बच्चों को ज्ञात होता है कि कैसे विभिन्न समुदायों ने ख़ुद को और अपने आपसी संबंधनों को समझते हुए प्रकृति के साथ अपने संबंधो को भी जाना। बाल साहित्य द्वारा बच्चे कहानियों के विभिन अवयवों जैसे – कथानक, विषयवस्तु और चरित्रों से रूबरू होने के साथ – साथ, कहीं न कहीं भाषा और मूल्यों से भी परिचित होते हैं।  

अतः प्रोजेक्ट लेमन चूस का उद्देश्य है –  मैथिलि में गुणवत्ता पूर्ण बाल साहित्य का निर्माण करना और उसे बच्चों तक पहुँचाना। मैथिलि, जो कि उत्तरी बिहार में बोली जाने वाली भाषा है, लाखों बच्चों की ज़ुबान पर तो है लेकिन फिर भी सामाजिक और राजनैतिक रूप से प्रभावी अन्य भाषाओं के बीच अपनी एक जगह बनाने का संघर्ष कर रही है। हम आशा करते हैं कि मैथिल बच्चे मैथिलि में लिखी इन किताबों को मजे के साथ पढेंगे और पसंद करेंगे। उम्मीद है कि इन किताबों में लिखी कहानियाँ उनकी यादों में लंबे समय तक रहेंगी, कुछ वैसे ही जैसे हमारे बचपन का लमन चूस, जिस का स्वाद आज भी हमारी यादों में ताज़ा है!

Children’s literature can act as both, a mirror and a window, to the worlds in which children live. It introduces them to stories, ideas and issues related to their own lives as well as to lives and worlds as yet unseen.  It makes available to them the collective knowledge about how individuals and communities have understood themselves and their relationships with each other and with nature. Through it, children also understand the elements of stories like plot, characters, theme, setting, values and language use.

Project Lemon Choos aims to create and make available, quality children’s literature in Maithili – a language of North Bihar, foremost on many a children’s tongue, yet struggling to hold its own against other socially and politically dominant languages. In addition to creating original works in Maithili, the project will also involve translations of some of the choicest works in children’s literature from across the world, that validate children’s imagination and keep their inner world thriving.  We hope Maithil children savour these books, much like the Lemon Choos we all savored as children.